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नॉरà¥à¤®à¤² डिलीवरी के बाद टांकों की देखà¤à¤¾à¤² कैसे करें?
दरअसल, डिलीवरी के समय मां के पेरिनियम (योनि और गà¥à¤¦à¤¾ के बीच का कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°) पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे कà¤à¥€-कà¤à¥€ वह हिसà¥à¤¸à¤¾ फट जाता है। वहीं, परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को देखते हà¥à¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤° वहां कट à¤à¥€ लगा सकते हैं। पेरिनियम à¤à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में जनà¥à¤® के दौरान हà¥à¤ इस घाव को à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठही टांके लगाने की जरूरत पड़ती है। इसके बाद कà¥à¤› दिनों के लिठचलना दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• हो सकता है। यहां तक कि खांसी या छींकते समय à¤à¥€ दरà¥à¤¦ का अनà¥à¤à¤µ हो सकता है (1), (2)।
पेरिनियम कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के फटने पर टांकों की जरूरत कब पड़ती है?
यह इस पर निरà¥à¤à¤° करता है कि बचà¥à¤šà¥‡ को जनà¥à¤® देने के दौरान पेरिनियम कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में कितना घाव हà¥à¤† है या वह कितना फटा है। पेरिनियम कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° अपने आप फटता है, तो इसे सà¥à¤ªà¥‹à¤‚टेनियस टियरà¥à¤¸ (Spontaneous Tears) कहते हैं। इसे पेरिनेल टà¥à¤°à¥‰à¤®à¤¾ (Perineal Trauma) यानी गà¥à¤¦à¤¾ और योनि के बीच जनà¥à¤® के समय अपने आप हà¥à¤† घाव के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है। इस अवसà¥à¤¥à¤¾ में करीब 60-70% महिलाओं को टांके की जरूरत पड़ती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को चार वरà¥à¤—ों में बांटा गया है (3)।
फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ डिगà¥à¤°à¥€ टियर : फरà¥à¤¸à¥à¤Ÿ डिगà¥à¤°à¥€ टियर की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में केवल पेरिनियम की तà¥à¤µà¤šà¤¾ को ही नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चता है। इसमें टांके की आवशà¥à¤¯à¤•ता कम से कम पड़ती है।
सेकंड डिगà¥à¤°à¥€ टियर : सेकंड डिगà¥à¤°à¥€ टियर की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पेरिनियम की मांसपेशियों और तà¥à¤µà¤šà¤¾ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चता है। यहां टांकों की जरूरत होती है।
थरà¥à¤¡ डिगà¥à¤°à¥€ टियर : थरà¥à¤¡-डिगà¥à¤°à¥€ टियर में बाहरी और आतंरिक à¤à¤¨à¤² सà¥à¤«à¤¿à¤‚कà¥à¤Ÿà¤° (अवरोधिनी गà¥à¤¦à¤¾) का à¤à¤¾à¤— तक फट सकता है। इस कंडीशन में à¤à¥€ टांके की जरूरत पड़ती है।
फोरà¥à¤¥ डिगà¥à¤°à¥€ टियर : चौथी डिगà¥à¤°à¥€ टियर में à¤à¤¨à¤² सà¥à¤«à¤¿à¤‚कà¥à¤Ÿà¤° कॉमà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡à¤•à¥à¤¸ और à¤à¤¨à¤² à¤à¤ªà¤¿à¤¥à¤¿à¤²à¤¿à¤¯à¤® (Anal Epithelium) यानी गà¥à¤¦à¤¾ के आसपास की ऊपरी तà¥à¤µà¤šà¤¾ तक फट सकती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठटांकों की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है।
सामानà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद टांके कैसे लगाठजाते हैं? | Normal Delivery Me Tanke Kaise Lagte Hain
पेरिनियम कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को फैलाने के लिठजब डॉकà¥à¤Ÿà¤° चीरा लगाते हैं, तो उसे à¤à¤ªà¤¿à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤Ÿà¥‰à¤®à¥€ (Episiotomy) और जब यह अपने आप फैल जाता है, तो इसे पेरिनियल टà¥à¤°à¥‰à¤®à¤¾ (Perineal Trauma) कहते हैं। इन दोनों ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठटांके की जरूरत पड़ती है। इन दोनों के उपचार और घाव à¤à¤°à¤¨à¥‡ के समय के साथ-साथ लगà¤à¤— सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤• सामान ही होती है (2)।
डिलीवरी के बाद मां को कà¥à¤› देर के लिठबेहोश किया जाता है या फिर इस जगह को सà¥à¤¨à¥à¤¨ करने के लिठलोकल à¤à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ दिया जाता है। उसके बाद पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को टांके के जरिठबंद कर दिया जाता है। ये टांके कà¥à¤› दिनों में तà¥à¤µà¤šà¤¾ के अंदर ही घà¥à¤² जाते हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निकालने की जरूरत नहीं होती है (4)।
टांके सूखने में कितने दिन लगते हैं?
टांके सूखने में कà¥à¤› हफà¥à¤¤à¥‡ लग सकते हैं (5)। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निकालने की जरूरत à¤à¥€ नहीं पड़ती है। टांके शरीर में अपने आप घà¥à¤² जाते हैं (6)। फिर à¤à¥€ आपको इसके लिठसावधानी बरतनी चाहिà¤, जिसके बारे में आगे पूरी जानकारी दी जा रही है। इससे संबंधित अधिक जानकारी के लिठआप डॉकà¥à¤Ÿà¤° की à¤à¥€ सलाह ले सकते हैं।
डिलीवरी के बाद टांके जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठकà¥à¤¯à¤¾ करें?
टांकों को जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ के लिठआप निमà¥à¤¨à¤²à¤¿à¤–ित उपायों को अपना सकती हैं (2)।
सिटà¥à¤œ बाथ (Sitz Bath) का उपयोग किया जा सकता है। इसमें सिरà¥à¤« कूलà¥à¤¹à¥‹à¤‚ को पानी में डà¥à¤¬à¥‹à¤¯à¤¾ जाता है। इसके लिठआप à¤à¤• बाथटब में इतना पानी लीजिठकि जिसमें आपका वूलà¥à¤µà¤° कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° (योनि के पास के हिसà¥à¤¸à¥‡) पानी में डूबा रहे।
बाथटब की जगह à¤à¤• चौड़े आकार का पà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¤¿à¤• टब à¤à¥€ लिया जा सकता है।
इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को दिन में करीब दो बार किया जा सकता है। साथ ही आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° से à¤à¥€ पूछ सकते हैं।
सिटà¥à¤œ बाथ को डिलीवरी के करीब 24 घंटे बाद ही करना चाहिà¤à¥¤
हर 2 से 4 घंटे में अपना पैड बदलें।
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